जब बरगद ने कराया नन्हे पौधे को अपने शक्तिशाली होने का अहसास

Publish Date : 24 / 10 / 2018

मल्टीमीडिया डेस्क। उम्र बढ़ने के साथ बरगद का विस्तार भी होता रहा। लगभग चालीस फीट का स्थान उसने चारों ओर से घेर लिया। परिणामस्वरूप छोटे-छोटे पौधे नष्ट होते गए। एक पौधे ने हिम्मत करके बरगद से पूछ ही लिया- 'दादा! अधिग्रहण करते हुए हमें उजाड़ रहे हो, नष्ट कर रहे हो! आखिर क्यों! 

सुनो 'रावण की तरह ( सीता अपहरण), अमेरिका की तरह ( इराक और अफगानिस्तान को तहस-नहस करने वाला), पाकिस्तान की तरह ( आतंकवाद फैलाकर) मैं भी बाहुबली बनना चाहता हूं। दुनिया को अपनी ताकत के बल पर, अपनी विस्तारवादी नीति के बल पर जीतना चाहता हूं। तुम जैसे छोटे-मोटे पौधे तो मामूली है। मैं तो नीम, पीपल जैसे पेड़ों की भी जमीन हड़पने की योजना बना रहा हूं। तभी तो मेरा विस्तार होगा। मेरी ताकत का सब लोहा मानेंगे।' नन्हा पौधा चुप हो गया।

इस तरह बरगद ने इशारों-इशारों में अपने बड़े होने की अहमियत और रुतबे का एहसास नन्हे पौधों को करा दिया। और साथ ही इस बात का भी एहसास करवाया कि किस तरह से प्रकृति में कोई भी शक्तिशाली होने से अपनी सीमाओं का उल्लघंन करने लगता है। अपनी शक्तियों का दुरूपयोग करने लगता है और इसी के साथ सामाजिक ढांचा वह चाहे जंगल का हो इंसानी आबादी का हो तहस-नहस होने लगता है।

इसलिए इस कहानी से इस बात की सीख मिलती है कि किसी भी इंसान को मर्यादाओं में रहकर अपनी महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करना चाहिए।

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