गरबा में क्यों किया जाता है "तीन ताली" का प्रयोग...

Publish Date : 01 / 10 / 2018

त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। 10 अक्टूबर से नवरात्रि की भी शुरूआत होने वाली है। नवरात्रि के दिनों में गरबा की बड़ी धूम होती है। वैसे तो ये गुजरात का पारंपरिक नृत्य है, लेकिन इसमें इतना उत्साह है कि अब ये डांस पूरे देश में होने लगा है। हर राज्य में नवरात्रि के दौरान गरबा खेला जाता है, जिसके लिए लोगों को पहले से टे्रनिंग दी जाने लगती है। आपने कभी गौर किया हो तो गरबा के स्टेप्स काफी आसान होते हैं, इसे करने में भी आनंद और जोश पैदा होता है। लेकिन एक स्टेप ऐसा होता है, जिसे तीन ताली कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि गरबे में एक या दो ताली का नहीं बल्कि तीन ताली का ही उपयोग क्यों होता है। तो चलिए हम आपको बताते हैं इसके पीछे की मुख्य वजह। 

गरबा में तीन तालियों का महत्व

महिलाएं गरबा खेलते समय तीन तालियों का प्रयोग करती हैं। इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है। दरअसल, पूरा ब्रह्मांड ब्रह, विष्णु, महेश के इर्द-गिर्द ही घूमता है। इन तीन देवों की कलाओं को एकत्रित कर शक्ति का आहवान किया जाता है। ये है तीन तालियों का महत्व: 

गरबा में पहली ताली के मायने क्या हैं

गरबा में पहली ताली ब्रह यानि इच्छा से संबंधित है। ब्रह्मा की इच्छा तरंगों को ब्रहमांड के अंतर्गत जागृत किया जाता है। यह मनुष्य की भावनाओं और इच्छाओं का समर्थन करती है। 

गरबा में दूसरी ताली के मायने क्या हैं

दूसरी ताली का संबंध विष्णु भगवान से होता है। विष्णु रूपी तरंगे मनुष्य के भीतर शक्ति प्रदान करती है। 

गरबा में तीसरी ताली के मायने क्या हैं

तीसरी ताली का संबंध शिव भगवान से है। शिव रूपी ज्ञान तरंगें मनुष्य की इच्छा पूरी कर उसे फल प्रदान करती हैं। ताली की आवाज से तेज निर्मित होता है और इस तेज की मदद से शक्ति स्वरूप मां अंबा जागृत होती है। ताली बजाकर इसी तेज रूपी मां अंबा की अराधना की जाती है।

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