देश का विकास-जनता का कल्याण: तोमर

Publish Date : 28 / 12 / 2020

सत्ता सुधार। ग्वालियर/नई दिल्ली
देश के 11 अग्रणी किसान संगठनों ने सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भेंट कर नए कृषि सुधार कानूनों के प्रति अपना समर्थन और विश्वास व्यक्त किया है। किसान संगठनों ने इस अवसर पर सौंपे गए ज्ञापनों में एक स्वर में कहा कि ये कृषि सुधार कानून किसानों एवं देश के कृषि क्षेत्र की दशा और दिशा में आमूलचूल सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले हैं और इन्हें सरकार किसी भी परिस्थिति में वापस न लिए जायें । 
देश भर से आये विभिन्न किसान संगठनों इंडियन किसान यूनियन नई दिल्ली, राष्ट्रीय अन्नदाता यूनियन लखनऊ, राष्ट्रीय युवा वाहिनी लखनऊ, अखिल भारतीय बंग परिषद नई दिल्ली, भारतीय किसान संगठन दिल्ली प्रदेश, कृषि जागरण मंच पश्चिम बंगाल, प्रगतिशील किसान क्लब हरियाणा, जे एंड के किसान काउंसिल जम्मू और कश्मीर, जे एंड के डेरी प्रोड्यूसर्स प्रोसेसर्स एंड मार्केटिंग कॉप. यूनियन लिमिटेड जम्मू, महाराष्ट्र राज्य कृषक समाज जलगांव महाराष्ट्र और भारतीय कृषक समाज गाजियाबाद के प्रतिनिधिमंडल ने आज नए कृषि सुधार बिलों के समर्थन में ज्ञापन दिया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अपना कोई निजी स्वार्थ नहीं है, उनके सामने एक सूत्रीय कार्यक्रम है देश का विकास और देश की जनता का कल्याण। कृषि समृद्ध हो और अन्नदाता की आर्थिक स्थिति सुधरे इसी उद्देश्य के प्रति हमारे देश का प्रधानमंत्री पूरी तरह से समर्पित है। 
श्री तोमर ने कहा कि आजादी के 73 वर्ष में देश को आगे बढ़ाने की दृष्टि से कई प्रयास हुए हैं। उसी का परिणाम है कि आज खेती की दृष्टि से खाद्यान्न के क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में जाने जाते हैं। इसके पीछे किसानों का परिश्रम, वैज्ञानिकों का अनुसंधान व सरकार की कृषि हितैषी नीतियां हैं। एक समय था जब हम खाद्यान्न की दृष्टि से अभाव ग्रस्त थे। आबादी बढ़ रही थी लेकिन हम अभाव से जूझ रहे थे, इसलिए उस समय की सरकारों, किसानों, वैज्ञानिकों ने उत्पादकता बढ़ाने पर बल दिया। तब हमारी नीतियां उत्पादन केंद्रित थी, अब हम उत्पादन की दृष्टि से सरप्लस हो गए हैं। 
अब आज सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी नीतियां बनाई जाए जिसमें खाद्यान्न की बबार्दी रूके, कृषि में निजी निवेश आए, किसानों का शोषण रुके, उन्हें अपनी उपज के बेहतर व लाभकारी दाम मिले, किसान महंगी फसलों एवं उन्नत कृषि की ओर अग्रसर हो सके, इंस्पेक्टर राज खत्म हो सके, किसान वैश्विक मानक का उत्पादन करे और हमारा कृषि निर्यात बढ़े। श्री तोमर ने कहा कि इसीलिए ये रिफार्म किए गए हैं। ये सुधार आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
श्री तोमर ने कहा कि पूर्व की सरकारों, कृषि विशेषज्ञों, किसान संगठनों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों-मंत्रियों द्वारा लगातार इन सुधारों के समर्थन में बात उठाई जाती रही हैं। यूपीए शासनकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह एवं तत्कालीन कृषि मंत्री श्री शरद पंवार भी इन सुधारों को करना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि उनकी सरकार राजनीतिक दबाव व प्रभाव में ये निर्णय नहीं ले पाई। हम सभी का सौभाग्य है कि नरेन्द्र मोदी जी जैसा दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व आज देश का प्रधानमंत्री है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुधारों के लिए जितने भी सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, कुछ तत्वों ने इनका विरोध किया है, जबकि इन सुधारों ने देश की तस्वीर बदलने का काम किया है। इस तरह के तत्व किसान के कंधे का इस्तेमाल करके अपने मंसूबे पूरे करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।
मोदी जी का नेतृत्व ऐसा कोई निर्णय नहीं कर सकता जिससे इस देश के गांव, गरीब का नुकसान हो। हमारी सरकार आंदोलनकारी किसानों से भी चर्चा कर रही है। हमारी कोशिश है कि चर्चा करके इस मामले का समाधान निकाला जाए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने दस हजार एफपीओ का निर्माण, एक लाख करोड का इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना, एमएसपी को लागत मूल्य से डेढ़ गुना करना, पीएम किसान सम्मान निधि 75 हजार करोड़ रुपए सालाना किसानों के खाते में डालना, केसीसी के माध्यम से 15 लाख करोड़ के ऋण का वितरण और तीन कृषि सुधार कानून लाना किसानों की दशा बदलने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं, इनके सकारात्मक परिणाम एक-दो साल में सामने आएंगे।

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