दीपावली पर्व पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की अपील

Publish Date : 10 / 11 / 2020


खरगोन
दीपावली प्रकाश का पर्व है, लेकिन दीपावली के समय विभिन्न प्रकार के पटाखों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जाता है। ज्वलनशील एवं ध्वनि कारक पटाखों के उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में प्रदूषक तत्वों एवं ध्वनि स्तर में वृद्धि होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कुछ पटाखों से उत्पन्न ध्वनि की तीव्रता 100 डेसीबल से भी अधिक होती है।
इस प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाना अति आवश्यक है, जिससे मानव अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जीएसआर 682(ई)5 अक्टूबर 1999 में पटाखों के प्रस्फोटन से होने वाले शोर के लिए मानक के अनुसार प्रस्फोटन के बिंदु से 4 मीटर की दूरी पर 125डीबी (एआई) या 145 डीबी (सी) पीक से अधिक ध्वनि स्तर जनक पटाखों का विनिर्माण, विक्रय व उपयोग वर्जित है।
2 घंटे तक ही फोड़े दीपावली पर पटाखें= सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट-पिटीशन (सिविल) क्रमांक728/2015 ह्यह्यध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के परिप्रेक्ष्य में 23अक्टूबर 2018 को दिए गए निर्णयानुसार रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक (2 घंटे) के पश्चात् दीपावली पर्व पर पटाखों का उपयोग प्रतिबंधित है। लड़ी (जुड़े हुए पटाखों) गठित करने वाले अलग-अलग पटाखों के निर्माण, विक्रय एवं उपयोग पूर्णत: प्रतिबंधित है। दीपावली पर्व पर एवं अन्य पर्वो/अवसरों पर उन्नत पटाखे एवं ग्रीन पटाखे ही विक्रय किए जा सकेंगे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आम जनता से अपील की है कि पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में करें एवं पटाखों को जलाने के पश्चात उत्पन्न कचरे को घरेलू कचरे के साथ न रखे।
उन्हें पृथक स्थान पर रखकर नगर-निगम के कर्मचारियों को सौंप देवें। नगर-निगम एवं नगर पालिकाओं से भी यह भी अनुरोध है कि पटाखों का कचरा पृथक संग्रहित करके उसका निष्पादन सुनिश्चित करें।

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