Chaitra Navratri 2020: Lockdown में घर बैठे ऐसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ, होगी मनोकामना पूरी

Publish Date : 26 / 03 / 2020

Chaitra Navratri 2020: देवी दुर्गा की आराधना में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्व है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि सामान्य दिनों में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। साल में चार नवरात्र आते हैं और इन चार नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ विधि-विधान से करने से समस्त दुखों का नाश होता है, पापों का क्षमण होता है और सुख-समृद्धि के साथ विपुल धन संपदा मिलती है। इसलिए देवी उपासक Lockdown के दौरान नवरात्र के दिनों में उपवास और पूजा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ कर तकलिफों से निजात पा सकते हैं। दुर्गा सप्तशती के हर पाठ में मानव की चिंताओं का निवारण छिपा हुआ है। इसके तेरह अध्याय में प्रत्येक अध्याय में अलग-अलग बाधाओं के निवारण के उपाय दिए गए हैं. जिनको करने से समस्त प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिलता है।

तेरह पाठों में छिपे हैं कई बाधाओं के निवारण के मंत्र

दुर्गा सप्तशती के तेरह पाठों का वाचन संकल्प लेकर करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती के पहले अध्याय के करने से समस्त प्रकार की चिंताओं का नाश होता और मन-मस्तिष्क में सकारात्मक सोच का निर्माण होता है। इसके दूसरे अध्याय को करने से अदालती दिक्कतों जैसे मुकदमे, झगड़े आदि में सफलता प्राप्त होती है ,लेकिन किसी को परेशान करने के लिए किए गए मुकदमे का गलत परिणाम मिलता है। दुर्गा सप्तशती के तीसरे अध्याय का वाचन करने से शत्रु बाधा से छुटकारा मिलता है, इसके प्रभाव से शत्रु शांत हो जाता है। इसके चौथे अध्याय को करने से शक्ति मिलती है और आध्यात्म पक्ष प्रबल होता है। साधना करने वालों और समाजसेवकों के लिए इय अध्याय का पाठ उपयुक्त है।

शत्रुबाधा का होता है नाश और मनोकामना पूर्ण होती है

दुर्गा सप्तशती के पांचवे अध्याय को करने से भी आध्यात्म की शक्ति और मन कि शांति मिलती है। परेशानियों को दूर करने के लिए इस अध्याय का रोजाना पाठ करना चाहिए। छठा अध्याय करने से मन में बसे डर, शक और बाधाओं का इस अध्याय के पाठ से नाश होता है। तंत्र, जादू, टोना का और राहू-केतु के दोष इस अध्याय के पाठ से नष्ट होते हैं। सातवां अध्याय सभी सात्विक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उत्तम माना गया है। इसलिए मन की इच्छाओं की प्राप्ति के लिए सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए।

मिलाप और वशीकरण के लिए आठवे अध्याया का पाठ करना चाहिए। पुत्र की कामना और किसी गुम हुए व्यक्ति की तलाश के लिए दुर्गा सप्तशती के नौवे अध्याय का पाठ करना शुभ रहता है। दसवे अध्याय का पाठ भी गुम हुए व्यक्ति की तलाश और कामनाओं की पूर्ति करने के लिए किया जाता है। ग्यारहवें अध्याय का पाठ कारोबार में वृद्धि और सुख-संपत्ति के लिए किया जाता है। बारहवें अध्याय का पाठ धन लाभ और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। तेरहवे अध्याय का पाठ अध्यात्म में सिद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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