पर्यावरण को बचाना है तो जलाएं कंडों की होली

Publish Date : 05 / 03 / 2020

अगर पर्यावरण को बचाना है तो हमें इस बार 9 मार्च को होने वाले होलिका दहन के अवसर पर कंडों की होली जलानी चाहिए। क्योंकि कंडों की होली जलाने से न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण होने से बचता है वरन् वनों के विनाश पर भी रोक लग सकेगी। वहीं कंडों की होली से लकड़ियों की खपत कम हो जाएगी। नईदुनिया द्वारा चलाई जा रही आओ जलाएं कंडों की होली मुहिम के तहत शहरवासियों ने कुछ इस तरह का संकल्प लिया। शहरवासियों का कहना था कि हम सबको वृक्षों को सुरक्षति रखने का प्रयास करना होगा तभी पर्यावरण का संतुलन संभव है। इसके लिए सभी के मिले-जुले प्रयासों की जरुरत है।

वृक्षों को बचाए रखने के लिए इस बार कंडों की होली जलाना जरुरी है। कंडों की होली से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा वरन लकड़ियों की भी बचत होगी। 

हमारी पुरानी सनातन धर्म की परंपरा में कंडों से यज्ञ, हवन करने का अलग ही महत्व है। इसलिए शहरवासियों को इस बार कंडों की होली जलानी चाहिए जिससे लोग बेहतर हवा में सांस ले सकें।होली के त्यौहार पर लकड़ियों का इस्तेमाल जितना कम होगा उतना ही हमारे वन और पर्यावरण का विनाश होने से बच सकेगा। इसलिए लकड़ियों के स्थान पर गोबर से बने कंडे होली में इस्तेमाल करें।कंडों की होली जलाने से न सिर्फ पेड़-पौधों का विनाश रुकेगा वरन् धरती पर हरियाली कायम रखने में भी यह मददगार साबित होगा। कंडों की होली जलाकर हम सबको नईदुनिया की मुहिम में शामिल होना चाहिए।

हमें लकड़ियों के स्थान पर गोबर से बने कंडों की होली जलाना चाहिए, क्योंकि हमारे शहर में ही हजारों मवेशी हैं, जिनमें गाय और भैंस की नस्ल के पशुओं से कंडों का गोबर आसानी से मिल जाएगा और पर्यावरण बच सकेगा।

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