राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग में ठनी

Publish Date : 18 / 01 / 2020

जयपुर। पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच चल रही खींचतान ने प्रतिपक्षी भाजपा को बड़ा मुद्दा दे दिया है। पार्टी इसे चुनाव टाल कर प्रशासक नियुक्त करने की सरकार की तैयारी और सरकार व आयोग में बड़ी दरार के रूप में प्रचारित कर भुनाने की तैयारी कर रही है।

4000 पंचायतों में चुनाव अटके

राजस्थान में पंचायत चुनाव में इस बार कई गफलतें सामने आई और इसके चलते 4000 से ज्यादा पंचायतों के चुनाव अटके हुए हैं। चुनाव आयोग को दो बार कार्यक्रम में फेरबदल करना पड़ा है और पंचायत समिति व जिला परिषद के चुनाव के बारे में तो अभी तक यह पता नहीं है कि ये चुनाव कब होंगे।

मंत्री पायलट व आयोग के प्रमुख के बीच तकरार बढ़ी

खींचतान तब और बढ़ गई जब पंचायतीराज विभाग संभाल रहे उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने आयोग को तय समय में चुनाव कराने के लिए पत्र लिख दिया। इसके जवाब में आयोग ने विभाग को ही देरी के लिए दोषी ठहरा दिया। आयोग ने कहा कि वह कई बार सरकार को चेता चुका था कि पंचायतों का पुनर्गठन समय से कराएं, ताकि चुनाव समय पर हो सकें, लेकिन खुद विभाग ने देरी की और मामला कोर्ट में चला गया। इसी मुद्दे पर मंत्री पायलट और राज्य निर्वाचन आयुक्त पीएस मेहरा के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

भाजपा ने शुरू की घेराबंदी

राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच तकरार ने प्रतिपक्षी भाजपा को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा दे दिया है। सरपंच चुनाव में राजनीतिक दलों का सीधा दखल नहीं है और सरपंच पार्टियों के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन पंचायत समिति और जिला परिषदों के चुनाव राजनीतिक दलों के टिकट पर ही होंगे। यही कारण है कि पार्टी के नेता इसे बड़े मुद्दे के रूप में देख रहे हैं। पार्टी इसे चुनाव टाल कर प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के मंसूबे के रूप में प्रचारित कर रही है और कार्यकर्ताओ को भी संदेश दिया जा रहा है कि वे इसे ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करें।

 

राजस्थान सरकार 73वें संविधान संशोधन का उल्लंघन कर रही है। संविधान संशोधन लागू होने के बाद यह पहला मौका होगा जब पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो रहे हैं-राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष, राजस्थान विस।

-सरकार के दो गुटों की खींचतान ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को उलझा दिया है। पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है-अलका गुर्जर, पंचायत चुनाव समन्वयक, भाजपा।

 

लोकतंत्र बना रहे यह सबका सामूहिक कर्तव्य है। हमारी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी है। मशीनरी संसाधन सब तैयार हैं। आयोग तिथि तय करे। सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, उसके बाद स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। फिर भी हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार काम करेंगे-सचिन पायलट, उपमुख्यमंत्री।

आयोग ने विषय की गम्भीरता और संवैधानिक दायित्व को देखते समझते हुए समय-समय पर गंभीर प्रयास किए हैं, लेकिन पंचायतीराज विभाग द्वारा परिसीमन में अत्यधिक समय लगाने और लगातार अधिसूचनाएं जारी करने से यह स्थिति बनी। विभाग को सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका के शीघ्राताशीघ्र निस्तारण का प्रयास करना चाहिए-श्याम सिंह राजपुरोहित, सचिव राज्य निर्वाचन आयोग।

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