आईना भेजने वालों को छग ने दिखाया आईना

Publish Date : 24 / 05 / 2019

कभी-कभी अपना कहा, अपने को ही आईना दिखाने लग जाता है। छत्त्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के साथ यही कहावत चरितार्थ हुई। मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आईना यानी दर्पण उपहार स्वरूप भेजा था। यह दर्पण इसलिए भेजा गया था, ताकि मोदी अपनी असलियत को पहचान लें, किंतु अब पांच महीने के बाद ही छत्तीसगढ़ की 11 में से 9 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने जीत लगभग दर्ज कर ली है, उससे जाहिर है कि इस आईने में अब उन्हें ही अपना चेहरा देखने की जरूरत आन पड़ी है। पूरे राज्य में भाजपा का प्रदर्शन लाजवाब है। भाजपा ने यहां मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा। भाजपा ने अन्य राज्यों में भी वर्तमान सांसदों के टिकट काटे हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने यहां सभी मौजूदा सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को किस्मत आजमाने का मौका दिया। जीत के बाद लग रहा है कि भाजपा का निर्णय खरा उतरा है।

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में अंग्रेज हुकूमत के समय से चले आ रहे राजद्रोह कानून को समाप्त करने की बात कहकर बड़ी भूल की थी। इस कानून को समाप्त करने का कारण कांग्रेसियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बताया कि इस कानून का रमन सिंह सरकार ने सबसे ज्यादा दुरुपयोग कर आदिवासियों को माओवादी नक्सली ठहराने का काम किया है। इसके चलते सैकड़ों लोगों को हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया। इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न् हुई और आदिवासियों समेत अन्य नागरिकों को लगा कि नक्सलियों को राजद्रोह का कानून हटा देने से लाभ मिलेगा, उनके हितों का सरंक्षण होगा और वे ज्यादा आक्रामक हो जाएंगे।

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी भत्ता देने, शराबबंदी लागू करने, किसानों का कर्ज माफ करने और चिटफंड घोटाले में आम नागरिकों से लूटे गए धन को वापस लाने के वादे किए थे, जो कसौटी पर खरे नहीं उतरे। दूसरी तरफ राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी गरीबी हटाओ न्यूनतम आय योजना 'न्याय" बेअसर रही। नतीजतन चार-पांच महीने बाद ही मतदाता कांग्रेस से विमुख हो गया।

दरअसल, कांग्रेस अपने किसी भी वादे पर अमल नहीं कर पाई, इसलिए आम जनता जल्दी ही कांग्रेस से रूठने लग गई। वोटों का बंटवारा न हो, इस नजरिए से अजीत जोगी ने अपनी पार्टी जनता कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे थे। उन्होंने ऐसा कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने की दृष्टि से किया था। यहां आठ से दस प्रतिशत कुर्मी, आठ से दस प्रतिशत साहू और दस प्रतिशत सतनामी मतदाता हैं, किंतु मोदी के नाम पर चली राष्ट्रवाद की लहर ने सभी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष अनुबंधों पर पानी फेर दिया।

बहरहाल, छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत स्थानीय मुद्दों के बजाय राष्ट्रवाद जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर कहीं ज्यादा केंद्रित रही है। इसमें सोने में सुहागे जैसा काम नरेंद्र मोदी सरकार की आवास, उज्ज्वला व हर घर शौचालय जैसी योजनाओं ने किया है।

(लेखक राजनीतिक टिप्पणीकार हैं)

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